असल में मेडिकल भाषा में प्रेगनेंसी को महीनों के बजाय हफ्तों में गिना जाता है। सामान्य गर्भावस्था लगभग 40 हफ्तों की होती है। कई बार शरीर प्राकृतिक रूप से लेबर शुरू करने में थोड़ा अधिक समय लेता है, जिससे डिलीवरी देर से होती है। सही जानकारी होने पर डर और तनाव दोनों कम किए जा सकते हैं।
10 महीने में डिलीवरी कब हो सकती है?
अधिकतर महिलाओं में डिलीवरी 38 से 40 हफ्तों के बीच हो जाती है। लेकिन कुछ महिलाओं में लेबर पेन 40 हफ्ते पूरे होने के बाद शुरू होता है। ऐसे मामलों में डिलीवरी 10वें महीने में मानी जाती है और यह कई बार पूरी तरह सामान्य भी होती है।
9वें महीने के अंतिम दिनों में पेट का भारी लगना, शिशु की गतिविधियों में बदलाव और कमर में दर्द जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। ये कई बार 9 महीने में डिलीवरी लक्षण भी हो सकते हैं, जो यह बताते हैं कि शरीर धीरे-धीरे लेबर के लिए तैयार हो रहा है।
यदि डॉक्टर की जांच में माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, तो कुछ दिनों की देरी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं होती।
प्रेगनेंसी 10 महीने क्यों होती है?
बहुत-सी महिलाएं यह जानना चाहती हैं कि प्रेगनेंसी 10 महीने क्यों होती है, जबकि आमतौर पर इसे 9 महीने की प्रक्रिया कहा जाता है। इसका मुख्य कारण प्रेगनेंसी की गणना की विधि है।
गर्भावस्था की शुरुआत आखिरी पीरियड की तारीख से मानी जाती है, न कि कंसीव होने की वास्तविक तारीख से। अगर ओवुलेशन देर से हुआ हो, तो ड्यू डेट आगे खिसक जाती है। इसके अलावा पहली प्रेगनेंसी में शरीर को लेबर शुरू करने में अधिक समय लग सकता है। कुछ मामलों में बच्चे का सही पोजिशन में न आना भी देरी का कारण बन सकता है।
डिलीवरी डेट लेट होने के कारण
डिलीवरी डेट लेट होने के कारण शारीरिक और मानसिक दोनों हो सकते हैं। हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए लेबर शुरू होने का समय भी अलग-अलग हो सकता है।
आमतौर पर देरी के पीछे ये कारण होते हैं:
- ओवुलेशन की सही तारीख का पता न होना
- पहली बार गर्भधारण
- हार्मोनल असंतुलन
- अत्यधिक मानसिक तनाव या डर
- झूठे दर्द और असली लेबर पेन में भ्रम
कई महिलाएं 9वें महीने में झूठे दर्द का अनुभव करती हैं, जो असली लेबर पेन जैसा लगता है। यदि आपको भ्रम हो रहा हो, तो गर्भावस्था के 9 महीने में झूठी दर्द से जुड़ी जानकारी समझना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
40 हफ्ते के बाद डिलीवरी होना क्या सुरक्षित है?
कई महिलाओं के लिए यह जानना जरूरी होता है कि 40 हफ्ते के बाद डिलीवरी होना सुरक्षित है या नहीं। सामान्यतः 40 हफ्तों के बाद की प्रेगनेंसी को पोस्ट-टर्म कहा जाता है।
यदि बच्चे की धड़कन, मूवमेंट, एम्नियोटिक फ्लूइड और माँ की सेहत सामान्य है, तो डॉक्टर 41 हफ्ते तक इंतजार करने की सलाह दे सकते हैं। इस दौरान नियमित NST और अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है। लेकिन 42 हफ्तों के बाद जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए समय पर मेडिकल निर्णय जरूरी हो जाता है।
प्रेगनेंसी ओवरड्यू कब कहलाती है?
प्रेगनेंसी ओवरड्यू कब कहलाती है, यह समझना हर गर्भवती महिला के लिए बेहद जरूरी है। जब गर्भावस्था 40 हफ्ते और 7 दिन से आगे बढ़ जाती है, तो उसे ओवरड्यू प्रेगनेंसी कहा जाता है।
इस स्थिति में प्लेसेंटा की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है, जिससे बच्चे को मिलने वाला पोषण प्रभावित हो सकता है। इसलिए डॉक्टर मां और बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर लेबर इंडक्शन की सलाह देते हैं।
10वें महीने में लेबर पेन के लक्षण
जैसे-जैसे 10वां महीना नजदीक आता है, शरीर खुद को डिलीवरी के लिए तैयार करने लगता है। 10वें महीने में लेबर पेन के लक्षण धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगते हैं और पहले से ज्यादा नियमित हो जाते हैं।
- पेट और कमर में तेज और लगातार दर्द
- पेट का नीचे की ओर खिसकना
- बार-बार टॉयलेट जाने की इच्छा
- पानी की थैली फटना
- दर्द का निश्चित समय अंतराल पर आना
इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।
नॉर्मल डिलीवरी कितने हफ्ते में होती है?
अधिकतर महिलाओं में नॉर्मल डिलीवरी कितने हफ्ते में होती है, इसका जवाब 38 से 40 हफ्ते होता है। हालांकि कुछ मामलों में नॉर्मल डिलीवरी 41 हफ्तों के बाद भी संभव होती है, बशर्ते कोई जटिलता न हो।
यदि आप यह जानना चाहती हैं कि 9 महीने में डिलीवरी कब हो सकती है, तो इससे जुड़ी जानकारी आपकी शंकाओं को और स्पष्ट कर सकती है। संतुलित आहार, हल्का वॉक, डॉक्टर की सलाह और मानसिक रूप से शांत रहना नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाता है।
निष्कर्ष
अब आप स्पष्ट रूप से समझ गई होंगी कि 10 महीने में डिलीवरी कब हो सकती है और इसके पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार होते हैं। 40 हफ्तों के बाद भी डिलीवरी होना कई बार पूरी तरह सामान्य होता है, लेकिन नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह बहुत जरूरी होती है। सही जानकारी, धैर्य और समय पर देखभाल से माँ और बच्चे दोनों सुरक्षित रहते हैं। ऐसी ही विश्वसनीय प्रेगनेंसी जानकारी के लिए garbhaavastha.in से जुड़े रहें।


