कई महिलाओं को महीने में एक बार की जगह बार-बार पीरियड आने की समस्या होती है। कभी 15–20 दिन में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, तो कभी पीरियड्स लंबे समय तक चलते रहते हैं। यह परेशानी रोज़मर्रा की ज़िंदगी, काम और मानसिक सेहत पर असर डाल सकती है। कई बार कमजोरी, चक्कर और थकान जैसी दिक्कतें भी साथ में होने लगती हैं। बार-बार पैड बदलना और असहजता महसूस करना भी तनाव बढ़ा देता है। अक्सर महिलाएं इसे सामान्य समझकर अनदेखा कर देती हैं, जो आगे चलकर समस्या को और बढ़ा सकता है।
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प्रेग्नेंसी के दौरान cravings बढ़ जाना बहुत आम बात है। कभी मीठा खाने का मन करता है तो कभी कुछ चटपटा या इंस्टेंट। कई बार अचानक तेज भूख लगती है या मूड के साथ खाने की इच्छा बदल जाती है। ऐसे में कई महिलाओं के मन में यह सवाल आता है कि Pregnancy में Maggi खा सकते हैं या नहीं। Maggi जल्दी बनने वाली इंस्टेंट नूडल्स है, जो स्वाद में अच्छी लगती है और थकान के समय तुरंत राहत देती है, लेकिन क्या यह गर्भावस्था में सुरक्षित है?
PCOD एक आम हार्मोनल समस्या है, जिसकी वजह से कई महिलाओं को पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और प्रेग्नेंसी को लेकर चिंता बनी रहती है। बहुत सी महिलाओं के मन में यही सवाल होता है कि PCOD में प्रेग्नेंट हो सकते हैं या नहीं। सच यह है कि PCOD होने के बावजूद गर्भधारण संभव है, बस इसके लिए सही जानकारी, धैर्य और सही लाइफस्टाइल की जरूरत होती है।
दिव्य गर्भ संस्कार विज्ञान
गर्भावस्था एक संवेदनशील समय होता है, जिसमें शरीर और हार्मोन दोनों में कई बदलाव आते हैं। इस दौरान कुछ लक्षण सामान्य होते हैं, लेकिन कुछ संकेत ऐसे भी हो सकते हैं जो खतरे की ओर इशारा करते हैं। कई महिलाओं को यह समझ नहीं आता कि कौन-से लक्षण सामान्य हैं और कौन-से गर्भपात के लक्षण हो सकते हैं। सही समय पर पहचान और सही कदम उठाने से कई जटिलताओं से बचा जा सकता है।
पीरियड्स का सामान्य समय 3 से 7 दिन तक माना जाता है। लेकिन जब ब्लीडिंग 7 दिन से ज्यादा समय तक चले या हर महीने बहुत ज्यादा ब्लड लॉस हो, तो यह शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। कई महिलाएं इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि लंबे समय तक ज्यादा ब्लीडिंग से कमजोरी, चक्कर और एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार ऐसा होने पर शरीर की एनर्जी धीरे-धीरे कम होने लगती है और इम्यून सिस्टम भी कमजोर पड़ सकता है। समय रहते कारण पहचानना और सही कदम उठाना महिलाओं की सेहत के लिए बहुत जरूरी है।
पीरियड्स का अचानक बंद हो जाना या बार-बार मिस होना महिलाओं के लिए चिंता का कारण बन सकता है। कई बार यह शरीर में हो रहे सामान्य हार्मोनल बदलाव का संकेत होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह किसी अंदरूनी समस्या की ओर भी इशारा करता है। अगर लंबे समय तक पीरियड न आए तो यह ओवरी, थायरॉइड या रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी दिक्कत हो सकती है।
कई महिलाओं को समय पर पीरियड न आने की समस्या होती है और ऐसे में वे प्राकृतिक या घरेलू उपाय खोजने लगती हैं। भारतीय घरों में हल्दी को सेहत से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या हल्दी से पीरियड लाया जा सकता है। आयुर्वेद में हल्दी को शरीर को गर्म रखने वाला माना गया है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है और हार्मोनल सिस्टम पर भी हल्का प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से लोग मानते हैं कि पीरियड लाने का उपाय हल्दी से किया जा सकता है।
अगर आपके मन में यह सवाल आता है कि पीरियड में बाल किस दिन धोना चाहिए, तो आप अकेली नहीं हैं। भारत में आज भी पीरियड्स से जुड़े कई मिथक प्रचलित हैं- कहीं कहा जाता है कि पहले दिन बाल नहीं धोने चाहिए, कहीं ठंडे पानी से नहाना मना किया जाता है। इन बातों की वजह से कई लड़कियाँ और महिलाएँ कन्फ्यूजन में रहती हैं और सही हाइजीन रूटीन फॉलो नहीं कर पातीं।
अगर आपके मन में यह सवाल है कि पीरियड के कितने दिन पहले वाइट डिस्चार्ज होता है, तो जान लें कि यह महिलाओं के शरीर की एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। पीरियड आने से पहले हार्मोनल बदलाव के कारण वेजाइना से सफेद या हल्का क्रीम कलर का डिस्चार्ज होना आम बात है। कई महिलाओं को यह डिस्चार्ज 5–7 दिन पहले दिखने लगता है, जबकि कुछ को 2–3 दिन पहले। यह समय हर महिला के हार्मोनल पैटर्न और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है।
अगर आपको महीने में दो बार पीरियड आना घरेलू उपाय खोजने की ज़रूरत पड़ रही है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके शरीर में हार्मोनल बदलाव, लाइफस्टाइल या किसी हेल्थ कंडीशन का असर पड़ रहा है। कई महिलाओं को यह समस्या अचानक होती है, जिससे घबराहट और चिंता बढ़ जाती है। कभी-कभी मौसम बदलने, ज्यादा स्ट्रेस लेने या ट्रैवल के कारण भी पीरियड साइकल गड़बड़ा जाता है।
पीरियड लेट होना आजकल कई महिलाओं के लिए आम समस्या बन गई है। बदलती लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, नींद की कमी और हार्मोनल बदलाव इसके पीछे बड़ी वजह होते हैं। कई बार काम का प्रेशर, भावनात्मक तनाव या अचानक रूटीन बदलने से भी मासिक धर्म चक्र गड़बड़ा जाता है। जब पीरियड समय पर नहीं आता, तो मन में बेचैनी, डर और कई तरह के सवाल पैदा हो जाते हैं।
पीरियड का समय कभी-कभी बदल जाना सामान्य है, लेकिन अगर लगातार साइकिल लेट हो रही हो, तो यह चिंता का विषय बन सकता है। कई महिलाओं के लिए यह सवाल अक्सर उठता है कि पीरियड लेट हो तो क्या करें और इसे सही तरीके से कैसे मैनेज किया जा सकता है। असल में देरी के पीछे हार्मोनल बदलाव, स्ट्रेस, वजन में बदलाव, थकान या लाइफस्टाइल से जुड़ी वजहें हो सकती हैं। कई बार मौसम, ट्रैवल या नींद के पैटर्न में बदलाव से भी साइकिल प्रभावित होती है।

