कई कपल्स के लिए बार-बार कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण न होना मानसिक और भावनात्मक रूप से काफी परेशान करने वाला हो सकता है। ऐसी स्थिति में सही समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि समस्या की जड़ को समझकर सही इलाज शुरू किया जा सके।
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दिव्य गर्भ संस्कार विज्ञान
प्रेगनेंसी की शुरुआत में शरीर के अंदर बहुत तेजी से बदलाव होते हैं। इस दौरान कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण में पेट में दर्द महसूस होता है। कभी यह हल्की खिंचाव जैसा होता है, तो कभी बिल्कुल पीरियड जैसा दर्द लगता है। पहली बार गर्भ ठहरने पर यह डर और कन्फ्यूजन पैदा कर सकता है क्या यह नॉर्मल है या किसी समस्या का संकेत?
पीरियड मिस होने से पहले प्रेगनेंसी टेस्ट कब करे – यह सवाल उन महिलाओं के मन में सबसे ज्यादा आता है जो जल्दी प्रेग्नेंसी कन्फर्म करना चाहती हैं या अनचाही प्रेगनेंसी को लेकर चिंतित रहती हैं। कई बार हल्की थकान, मतली या सीने में भारीपन जैसे बदलाव दिखने लगते हैं और मन में शक पैदा होता है कि कहीं प्रेगनेंसी तो नहीं ठहर गई। ऐसे में जल्दी टेस्ट करने की इच्छा होना स्वाभाविक है।
बच्चा गिराने के बाद कितने दिन बाद पीरियड आता है – यह सवाल लगभग हर महिला के मन में आता है, चाहे गर्भपात मेडिकल कारणों से हुआ हो या किसी अन्य वजह से। गर्भपात के बाद शरीर को दोबारा नॉर्मल हार्मोनल साइकिल में लौटने में समय लगता है। इस दौरान ब्लीडिंग, कमजोरी, मूड स्विंग्स और पीरियड्स के समय में बदलाव होना आम बात है। कई बार महिलाओं को हल्का चक्कर, पेट में खिंचाव या थकावट भी महसूस होती है, जो शरीर की रिकवरी प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
मां बनने के बाद महिला के जीवन में कई शारीरिक और भावनात्मक बदलाव आते हैं। इसी दौरान एक सामान्य सवाल उठता है - डिलीवरी के कितने दिन बाद प्रेग्नेंट होती है? क्या शरीर इतनी जल्दी दोबारा गर्भधारण के लिए तैयार हो जाता है या कुछ समय तक पूरी तरह सुरक्षित रहता है? कई महिलाएं यह मान लेती हैं कि जब तक पीरियड शुरू नहीं होते, तब तक प्रेग्नेंसी संभव नहीं है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है।
कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि पीरियड में संबंध बनाने से क्या होता है और क्या यह सुरक्षित है या नहीं। मासिक धर्म के दौरान शारीरिक संबंध बनाना पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन इससे जुड़े फायदे और संभावित नुकसान को समझना जरूरी है। सही जानकारी होने से आप सुरक्षित और जागरूक निर्णय ले सकते हैं।
गर्भावस्था का नौवां महीना एक खास समय होता है। इस समय माँ का शरीर डिलीवरी की तैयारी कर रहा होता है और कई नए बदलाव महसूस होते हैं। इन्हीं बदलावों में से एक है योनि से सफेद पानी आना। यह अनुभव कई महिलाओं को थोड़ा असहज और चिंतित कर देता है। मन में तुरंत सवाल उठता है, प्रेगनेंसी में 9 महीने में सफेद पानी क्यों आता है, क्या यह सामान्य है या किसी समस्या का संकेत?
गर्भावस्था की शुरुआत के साथ ही महिला के शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं। इनमें से कुछ बदलाव साफ दिखाई देते हैं, जबकि कुछ अंदर ही अंदर होते हैं। उन्हीं में से एक आम लेकिन थोड़ा परेशान करने वाला लक्षण है, बार-बार पेशाब आना। बहुत सी महिलाएँ शुरुआत में इसे समझ नहीं पातीं और सोचती हैं कि कहीं यह किसी बीमारी का संकेत तो नहीं। दरअसल, शरीर नई स्थिति के अनुसार खुद को ढाल रहा होता है, और यही बदलाव इस तरह के लक्षणों के रूप में महसूस होते हैं। सही जानकारी होने से घबराहट कम होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
पीरियड महिलाओं के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेत होता है। जब मासिक धर्म समय पर आता है, तो यह दर्शाता है कि शरीर का हार्मोनल सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है। लेकिन जब लगातार दो महीने तक पीरियड नहीं आता, तो चिंता होना स्वाभाविक है। ऐसे में मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है - 2 महीने से पीरियड नहीं आया तो क्या करें?
महिलाओं के शरीर का मासिक चक्र एक प्राकृतिक और बेहद संतुलित प्रक्रिया है, लेकिन इसे समझना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। अक्सर यह सवाल मन में आता है, ओवुलेशन पीरियड के कितने दिन बाद होता है? कई बार पीरियड की तारीख आगे-पीछे हो जाने पर घबराहट भी होने लगती है, और तब यह जानना और जरूरी हो जाता है कि शरीर के अंदर क्या हो रहा है। सही जानकारी होने से अनावश्यक तनाव कम होता है और आप अपने शरीर के संकेतों को बेहतर तरीके से समझ पाती हैं।

