अक्सर महिलाओं को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उन्हें रसौली है, जब तक कि अत्यधिक ब्लीडिंग, दर्द या प्रेगनेंसी में दिक्कत जैसी समस्याएं शुरू न हो जाएं। कुछ मामलों में यह समस्या रूटीन हेल्थ चेकअप या अल्ट्रासाउंड के दौरान संयोग से पता चलती है। इसलिए महिलाओं के लिए नियमित स्त्री रोग जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। रसौली का आकार, संख्या और स्थान हर महिला में अलग-अलग हो सकता है। यही कारण है कि लक्षण भी सभी में समान नहीं होते।
यूटेराइन फाइब्रॉइड (Uterine Fibroid) क्या होता है?
यूटेराइन फाइब्रॉइड गर्भाशय की मांसपेशियों से बनने वाली ठोस गांठें होती हैं। इनका आकार बहुत छोटा (बीज जितना) से लेकर बड़ा (तरबूज जितना) भी हो सकता है। कुछ महिलाओं में एक ही फाइब्रॉइड होता है, जबकि कुछ में कई गांठें विकसित हो सकती हैं।
इनकी ग्रोथ हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) से प्रभावित होती है, इसलिए प्रजनन आयु की महिलाओं में यह ज्यादा देखी जाती हैं। रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद अक्सर इनका आकार छोटा होने लगता है क्योंकि शरीर में हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। फाइब्रॉइड गर्भाशय के अलग-अलग हिस्सों में हो सकते हैं अंदर की परत में, मांसपेशियों की दीवार में, या बाहर की सतह पर। इनकी जगह के अनुसार लक्षण और जटिलताएं बदल सकती हैं।
फाइब्रॉइड के लक्षण कैसे पहचानें
कई बार फाइब्रॉइड के लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं। शुरुआत में महिलाएं इन्हें सामान्य पीरियड समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं।
सामान्य लक्षण
- पीरियड के दौरान बहुत ज्यादा या लंबे समय तक ब्लीडिंग
- पेट के निचले हिस्से में भारीपन या दबाव
- बार-बार पेशाब लगना
- कमर या पैरों में दर्द
- सेक्स के दौरान दर्द
इसके अलावा कुछ महिलाओं को कब्ज, पेट फूलना या थकान भी महसूस हो सकती है। ज्यादा ब्लीडिंग के कारण शरीर में आयरन की कमी हो सकती है, जिससे एनीमिया हो जाता है।
पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग के कारण क्या फाइब्रॉइड हो सकता है?
पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग के कारण कई हो सकते हैं, लेकिन उनमें से एक प्रमुख कारण गर्भाशय में फाइब्रॉइड भी है। रसौली गर्भाशय की अंदरूनी परत पर दबाव डालती है, जिससे ब्लीडिंग ज्यादा और लंबे समय तक हो सकती है। कुछ महिलाओं को पीरियड के बीच में भी स्पॉटिंग हो सकती है। अगर हर महीने पैड या टैम्पोन बहुत जल्दी भर जाएं, या 7 दिनों से ज्यादा ब्लीडिंग रहे, तो यह सामान्य नहीं है।
अत्यधिक ब्लीडिंग के कारण शरीर में खून की कमी (एनीमिया) भी हो सकती है, जिससे थकान, कमजोरी, सांस फूलना और चक्कर आने की समस्या बढ़ जाती है।
पेट के निचले हिस्से में दर्द के कारण और फाइब्रॉइड का संबंध
पेट के निचले हिस्से में दर्द के कारण अगर बार-बार महसूस हो रहे हैं, तो यह फाइब्रॉइड का संकेत हो सकता है। खासकर जब दर्द:
- पीरियड के दौरान बढ़ जाता हो
- लगातार भारीपन जैसा महसूस हो
- कमर तक फैलता हो
बड़ी रसौली आसपास के अंगों जैसे मूत्राशय या आंतों पर दबाव डाल सकती है। इससे पेशाब बार-बार लगना या कब्ज की समस्या भी हो सकती है। कुछ मामलों में अचानक तेज दर्द तब होता है जब रसौली की रक्त आपूर्ति बाधित हो जाती है।
फाइब्रॉइड की जांच कैसे होती है
अक्सर महिलाओं को नियमित जांच के दौरान पता चलता है। डॉक्टर फाइब्रॉइड की जांच कैसे होती है यह आपकी स्थिति देखकर तय करते हैं।
आम जांच तरीके:
- पेल्विक एग्जाम
- अल्ट्रासाउंड
- MRI
- हिस्टेरोस्कोपी
अगर महिला प्रेगनेंसी प्लान कर रही हो, तो डॉक्टर गर्भाशय की स्थिति को और अच्छे से समझने के लिए अतिरिक्त जांच भी सलाह दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में ओव्यूलेशन और शुरुआती गर्भावस्था से जुड़े संकेत समझना भी जरूरी होता है, जैसे अंडा फटने के बाद गर्भावस्था के लक्षण।
गर्भाशय की गांठ का इलाज कैसे किया जाता है
गर्भाशय की गांठ का इलाज रसौली के आकार, लक्षणों और महिला की उम्र/प्रेगनेंसी प्लान पर निर्भर करता है।
1️⃣ दवाइयों से इलाज
हल्के लक्षणों में हार्मोनल दवाएं या दर्द कम करने की दवाएं दी जाती हैं। आयरन सप्लीमेंट भी दिए जा सकते हैं ताकि खून की कमी पूरी हो सके।
2️⃣ नॉन-सर्जिकल ट्रीटमेंट
कुछ आधुनिक तकनीकें रसौली की रक्त सप्लाई रोककर उसे छोटा करने में मदद करती हैं। जो महिलाएं भविष्य में प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं, उन्हें इलाज का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। प्रेगनेंसी प्लानिंग से जुड़े और भी महत्वपूर्ण विषय होते हैं, जैसे प्रेगनेंसी में पति से कब दूर रहना चाहिए।
3️⃣ सर्जरी
जब रसौली बहुत बड़ी हो जाए या ज्यादा ब्लीडिंग/दर्द दे, तब ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है। इलाज के बाद यदि महिला गर्भधारण की योजना बना रही है, तो सही समय जानने के लिए गर्भावस्था कैलकुलेटर जैसे टूल भी उपयोगी हो सकते हैं।
क्या गर्भाशय में रसौली से प्रेगनेंसी पर असर पड़ता है?
हर महिला में असर अलग होता है। कुछ महिलाएं फाइब्रॉइड के साथ भी सामान्य प्रेगनेंसी कर लेती हैं, जबकि कुछ में गर्भ ठहरने में दिक्कत आ सकती है। रसौली का आकार और स्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भाशय की अंदरूनी परत में मौजूद फाइब्रॉइड गर्भ के विकास में बाधा डाल सकते हैं। कभी-कभी यह भ्रूण के लिए जगह कम कर देते हैं या प्लेसेंटा की पोजिशन को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए यदि कोई महिला प्रेगनेंसी प्लान कर रही है और उसे लंबे समय से भारी पीरियड, दर्द या पेट में दबाव जैसा महसूस होता है, तो पहले जांच कराना फायदेमंद रहता है।
निष्कर्ष
गर्भाशय में रसौली एक आम लेकिन नजरअंदाज न की जाने वाली समस्या है। सही समय पर पहचान, जांच और इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है।
महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए जागरूक रहना, शरीर के संकेतों को समझना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है। शुरुआती लक्षणों को हल्के में न लें, क्योंकि समय पर उपचार से सर्जरी जैसी बड़ी प्रक्रिया से भी बचा जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली भी गर्भाशय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।


