किशोरावस्था से लेकर 30–35 साल की उम्र तक यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। कुछ महिलाओं को शादी या डिलीवरी के बाद दर्द में कमी भी महसूस होती है, जबकि कुछ में उम्र बढ़ने के साथ दर्द बढ़ सकता है। दर्द का स्तर हर महीने अलग भी हो सकता है, जो हार्मोनल बदलावों पर निर्भर करता है। हालांकि हल्का दर्द सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर दर्द असहनीय हो या हर महीने बढ़ता जाए, तो इसके पीछे कोई मेडिकल कारण भी हो सकता है। इसलिए इस दर्द को समझना और सही समय पर उपाय करना जरूरी है।
मासिक धर्म में पेट दर्द क्यों होता है
मासिक धर्म में पेट दर्द का मुख्य कारण गर्भाशय की मांसपेशियों का सिकुड़ना (contractions) होता है। जब पीरियड शुरू होते हैं, तो गर्भाशय अपनी अंदरूनी परत को बाहर निकालने के लिए संकुचन करता है। इस प्रक्रिया में शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन नामक केमिकल रिलीज होता है, जो दर्द और ऐंठन बढ़ा सकता है।
जिन महिलाओं में यह केमिकल ज्यादा मात्रा में बनता है, उन्हें ज्यादा तेज दर्द महसूस हो सकता है। यही कारण है कि कुछ लोगों को पीरियड के पहले दिन ज्यादा तकलीफ होती है। जैसे-जैसे ब्लीडिंग कम होती है, दर्द भी धीरे-धीरे कम होने लगता है।
तनाव, नींद की कमी और शारीरिक कमजोरी भी दर्द की तीव्रता को बढ़ा सकते हैं। अगर पीरियड साइकिल में अचानक बदलाव आए या बिना पीरियड के ब्लीडिंग होना जैसी समस्या दिखे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पीरियड क्रैम्प्स के कारण क्या होते हैं
पीरियड क्रैम्प्स के कारण केवल सामान्य हार्मोनल बदलाव ही नहीं होते, बल्कि कई स्वास्थ्य स्थितियां भी इसके पीछे हो सकती हैं:
- एंडोमेट्रियोसिस
- एडेनोमायोसिस
- गर्भाशय में फाइब्रॉइड
- पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID)
- कॉपर-T या अन्य IUCD का उपयोग
इसके अलावा धूम्रपान, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी भी दर्द को बढ़ा सकती है। जिन महिलाओं को पीरियड बहुत कम या बहुत हल्के आते हैं, उन्हें भी हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए पीरियड कम आने के नुकसान पढ़ना मददगार हो सकता है।
अगर दर्द हर महीने बढ़ता जा रहा हो या ब्लीडिंग के साथ असामान्य लक्षण हों, तो यह केवल सामान्य पीरियड दर्द नहीं हो सकता और जांच की जरूरत होती है।
डिसमेनोरिया क्या है और यह क्यों होता है
बहुत अधिक दर्द वाले पीरियड को मेडिकल भाषा में डिसमेनोरिया कहा जाता है। कई महिलाएं पूछती हैं – डिसमेनोरिया क्या है? यह ऐसी स्थिति है जिसमें पीरियड के दौरान बहुत तेज ऐंठन, उल्टी, चक्कर या कमजोरी भी महसूस हो सकती है।
डिसमेनोरिया दो प्रकार का होता है:
प्राइमरी – जो किशोरावस्था से ही शुरू हो जाता है और आमतौर पर गंभीर बीमारी से जुड़ा नहीं होता।
सेकेंडरी – जो किसी अंदरूनी समस्या जैसे एंडोमेट्रियोसिस या फाइब्रॉइड के कारण होता है।
सेकेंडरी डिसमेनोरिया में दर्द उम्र के साथ बढ़ता जाता है और पीरियड खत्म होने के बाद भी बना रह सकता है। अगर पीरियड समय पर न आएं और फिर अचानक दर्द के साथ शुरू हों, तो पीरियड मिस होने के 7 दिन बाद क्या करना चाहिए, यह जानना भी जरूरी हो सकता है।
पीरियड में कमर दर्द क्यों होता है
कई महिलाओं को पेट के साथ-साथ कमर में भी दर्द महसूस होता है। सवाल उठता है – पीरियड में कमर दर्द क्यों होता है?
गर्भाशय के संकुचन और सूजन के कारण आसपास की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे दर्द कमर और जांघों तक फैल सकता है। कुछ मामलों में लंबे समय तक बैठना या गलत पॉश्चर भी दर्द को बढ़ा सकता है।
हार्मोनल बदलावों के कारण शरीर में पानी रुक सकता है, जिससे सूजन और अकड़न बढ़ जाती है। हल्की मालिश, गर्म सेक और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से कमर दर्द में राहत मिल सकती है।
पीरियड दर्द कम करने के उपाय घर पर
अच्छी बात यह है कि कई आसान घरेलू तरीके पीरियड दर्द कम करने के उपाय के रूप में काफी असरदार हो सकते हैं:
- पेट पर गर्म पानी की बोतल रखना
- हल्की स्ट्रेचिंग या योग करना
- गुनगुना पानी पीना
- कैफीन कम लेना
- पर्याप्त नींद लेना
अदरक की चाय, सौंफ का पानी या हल्दी वाला दूध भी सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। मैग्नीशियम और विटामिन B1 जैसे पोषक तत्व भी मांसपेशियों को आराम देने में सहायक माने जाते हैं।
पीरियड दर्द का इलाज कब जरूरी होता है
अगर घरेलू उपाय काम न करें, तो पीरियड दर्द का इलाज डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए। डॉक्टर दर्द कम करने की दवाएं, हार्मोनल पिल्स या अन्य ट्रीटमेंट सुझा सकते हैं।
कुछ मामलों में अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच कर यह देखा जाता है कि दर्द के पीछे कोई अंदरूनी समस्या तो नहीं। सही इलाज मिलने पर दर्द की तीव्रता और अवधि दोनों कम हो सकती हैं।
इन लक्षणों में डॉक्टर से मिलना जरूरी है:
- दर्द के कारण बेहोशी जैसा महसूस होना
- हर महीने दर्द बढ़ते जाना
- बहुत ज्यादा ब्लीडिंग
- बुखार या बदबूदार डिस्चार्ज
यह संकेत हो सकते हैं कि दर्द के पीछे कोई गंभीर कारण छिपा है।
निष्कर्ष
पीरियड के टाइम दर्द सामान्य हो सकता है, लेकिन हर बार इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। शरीर के संकेतों को समझना और जरूरत पड़ने पर इलाज लेना जरूरी है। सही देखभाल, घरेलू उपाय और समय पर मेडिकल सलाह से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
महिलाओं को अपने मासिक धर्म स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए और दर्द को “सामान्य” मानकर सहते रहना जरूरी नहीं है। नियमित साइकिल पर ध्यान देना, असामान्य लक्षणों को नोटिस करना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना लंबे समय तक राहत दिलाने में मदद करता है।


