पीरियड लेट आने के संकेत कई कारणों से हो सकते हैं। कभी यह सामान्य जीवनशैली बदलावों की वजह से होता है, तो कभी यह शरीर में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत भी हो सकता है। इसलिए सही वजह समझना जरूरी है। कई बार महिलाएं हल्की देरी को नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन अगर यह बार-बार हो रहा है तो शरीर की अंदरूनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। शरीर का मासिक चक्र हार्मोन, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और दिनचर्या इन सभी चीजों से जुड़ा होता है। यही कारण है कि छोटी-सी गड़बड़ी भी चक्र को प्रभावित कर सकती है।
पीरियड लेट होने के कारण क्या हो सकते हैं
पीरियड लेट होने के कारण हमेशा प्रेगनेंसी ही नहीं होते। कई बार रोजमर्रा की आदतें भी मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर देती हैं।
- अचानक वजन बढ़ना या कम होना
- ज्यादा तनाव
- नींद की कमी
- अत्यधिक व्यायाम
- यात्रा या रूटीन में बदलाव
ये सभी शरीर के हार्मोन बैलेंस को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे ओव्यूलेशन देरी से होता है और पीरियड भी लेट हो जाता है। इसके अलावा खानपान में पोषण की कमी, ज्यादा जंक फूड और आयरन की कमी भी मासिक चक्र को प्रभावित कर सकती है। मानसिक तनाव का सीधा असर दिमाग के उस हिस्से पर पड़ता है जो हार्मोन नियंत्रित करता है।
कभी-कभी अचानक डाइटिंग शुरू करना या लंबे समय तक उपवास करना भी पीरियड देरी का कारण बन सकता है। शरीर जब पर्याप्त ऊर्जा नहीं पाता, तो वह प्रजनन प्रणाली को अस्थायी रूप से धीमा कर देता है। इसी तरह शिफ्ट ड्यूटी या रात में काम करने वाली महिलाओं में भी हार्मोनल लय बिगड़ सकती है।
प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें
अगर पीरियड लेट हो रहा है, तो प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण भी साथ में दिखाई दे सकते हैं। हालांकि हर महिला में लक्षण अलग हो सकते हैं।
- स्तनों में भारीपन या दर्द
- बार-बार पेशाब आना
- थकान महसूस होना
- हल्की मिचली या उल्टी
- हल्की स्पॉटिंग (इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग)
अगर पीरियड की जगह हल्की स्पॉटिंग दिखे, तो कई महिलाएं इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि यह कभी-कभी बिना पीरियड के ब्लीडिंग होना भी हो सकता है, जिसके पीछे अलग कारण हो सकते हैं।
इनके अलावा कुछ महिलाओं को गंध के प्रति संवेदनशीलता, खाने की पसंद बदलना, मुंह का स्वाद बदलना या मूड में अचानक बदलाव भी महसूस हो सकते हैं। सुबह की मिचली (मॉर्निंग सिकनेस) दिन के किसी भी समय हो सकती है। कुछ महिलाओं को हल्का पेट खिंचाव या सुस्ती भी महसूस होती है, जो गर्भावस्था की शुरुआत में सामान्य है।
हार्मोनल असंतुलन के लक्षण क्या होते हैं
हार्मोनल असंतुलन के लक्षण भी पीरियड लेट होने का बड़ा कारण हो सकते हैं। जब एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर असंतुलित हो जाता है, तो मासिक धर्म समय पर नहीं आता।
- मुंहासे बढ़ जाना
- बाल झड़ना
- अचानक वजन बढ़ना
- मूड स्विंग्स
- बहुत हल्का या बहुत ज्यादा ब्लीडिंग
कभी-कभी पीरियड बहुत कम मात्रा में आते हैं, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि पीरियड कम आने के नुकसान भी हो सकते हैं। PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) जैसी समस्याएं भी हार्मोनल देरी का कारण बन सकती हैं। थायरॉइड हार्मोन में गड़बड़ी भी इसी तरह के लक्षण पैदा कर सकती है।
हार्मोनल गड़बड़ी के साथ त्वचा तैलीय होना, अनचाहे बाल बढ़ना या नींद का पैटर्न बिगड़ना भी देखा जा सकता है। लंबे समय तक असंतुलन रहने पर ओव्यूलेशन नियमित नहीं होता, जिससे गर्भधारण में भी कठिनाई आ सकती है।
मासिक धर्म देरी के कारण कब गंभीर हो सकते हैं
कभी-कभी मासिक धर्म देरी के कारण सामान्य नहीं होते और मेडिकल जांच की जरूरत होती है।
- थायरॉइड की समस्या
- PCOS
- अत्यधिक तनाव या डिप्रेशन
- लंबे समय तक बीमारी
- कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट
अगर लगातार 2–3 महीने तक पीरियड न आए, या बार-बार देरी के बाद अचानक असामान्य ब्लीडिंग हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। लंबे समय तक देरी होने से शरीर में हार्मोनल चक्र और ज्यादा बिगड़ सकता है।
कुछ मामलों में गर्भाशय की परत का मोटा होना (एंडोमेट्रियल इश्यू) या प्रोलैक्टिन हार्मोन का बढ़ना भी देरी का कारण बनता है। इसलिए बार-बार देरी होने पर अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट कराना फायदेमंद होता है।
अनियमित पीरियड समस्या कब ध्यान देने योग्य है
अनियमित पीरियड समस्या तब मानी जाती है जब पीरियड का चक्र हर महीने अलग-अलग हो – कभी 25 दिन, कभी 40 दिन। यह शरीर में चल रहे हार्मोनल बदलावों का संकेत हो सकता है। किशोरावस्था और मेनोपॉज से पहले के वर्षों में ऐसा होना आम है, लेकिन प्रजनन उम्र में बार-बार ऐसा होना जांच का विषय है। अगर अनियमितता के साथ ज्यादा दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग, कमजोरी या लंबे गैप हों, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
लंबे समय तक अनियमित चक्र रहने से एनीमिया, कमजोरी और प्रजनन संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं। सही समय पर इलाज से यह स्थिति सुधारी जा सकती है।
पीरियड मिस होने पर क्या करें
सबसे पहला कदम है घबराना नहीं। पीरियड मिस होने पर क्या करें यह जानना जरूरी है।
- 5–7 दिन इंतजार करें
- घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करें
- अगर टेस्ट नेगेटिव हो और पीरियड फिर भी न आए, तो डॉक्टर से मिलें
- अपने तनाव स्तर और लाइफस्टाइल पर ध्यान दें
अगर आप सोच रही हैं कि पीरियड मिस होने के 7 दिन बाद क्या करना सही रहता है, तो सही समय पर टेस्ट और मेडिकल सलाह लेना सबसे बेहतर कदम होता है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम से हार्मोन बैलेंस सुधर सकता है।
गर्म पानी पीना, हल्की एक्सरसाइज और योग भी शरीर को रिलैक्स करने में मदद करते हैं, जिससे हार्मोनल संतुलन बेहतर हो सकता है।
निष्कर्ष
पीरियड लेट आने के संकेत हमेशा प्रेगनेंसी का मतलब नहीं होते, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। शरीर छोटे-छोटे बदलावों के जरिए संकेत देता है कि अंदर क्या चल रहा है।
अगर पीरियड बार-बार लेट हो रहे हैं, असामान्य लक्षण दिख रहे हैं या प्रेगनेंसी की संभावना है, तो सही समय पर जांच करवाना ही समझदारी है। जागरूक रहना महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर पहचान ही सही इलाज की कुंजी है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और तनाव कम रखना नियमित मासिक चक्र के लिए बेहद फायदेमंद है।


