पीरियड से पहले का समय PMS (Premenstrual Syndrome) से जुड़ा होता है, जिसमें थकान, चिड़चिड़ापन, पेट दर्द और भावनात्मक बदलाव आम हैं। ऐसे में संबंध बनाने का फैसला जल्दबाज़ी में नहीं बल्कि महिला की शारीरिक और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर लेना चाहिए। हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए जो चीज़ एक महिला के लिए आरामदायक हो, वही दूसरी के लिए असहज हो सकती है। इसी कारण इस विषय पर सही और पूरी जानकारी होना जरूरी है।

पीरियड से पहले संबंध बनाने के फायदे

कुछ महिलाओं के लिए पीरियड से पहले संबंध बनाने के फायदे देखे जा सकते हैं, खासकर तब जब उन्हें PMS के लक्षण हल्के महसूस होते हों।

  • सेक्स के दौरान एंडॉर्फिन और ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज होते हैं, जो तनाव और चिंता को कम करते हैं
  • हल्की ऐंठन और कमर दर्द में अस्थायी राहत मिल सकती है
  • नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है
  • पार्टनर के साथ भावनात्मक जुड़ाव और अपनापन बढ़ता है

कई महिलाओं का अनुभव होता है कि संबंध बनाने के बाद उनका मूड हल्का और शांत महसूस होता है। हालांकि, अगर पेट दर्द ज्यादा हो, तो पहले पीरियड में पेट दर्द का घरेलू उपाय अपनाना ज्यादा समझदारी भरा होता है, ताकि शरीर पूरी तरह रिलैक्स महसूस करे।

पीरियड से पहले सेक्स सुरक्षित है या नहीं

अक्सर यह सवाल उठता है कि पीरियड से पहले सेक्स सुरक्षित है या नहीं। सामान्य स्थिति में, अगर महिला को कोई संक्रमण, अत्यधिक दर्द या मेडिकल समस्या नहीं है, तो यह सुरक्षित माना जा सकता है।

लेकिन इस समय शरीर थोड़ा ज्यादा संवेदनशील होता है। हार्मोनल बदलावों के कारण योनि का प्राकृतिक संतुलन बदल सकता है, जिससे जलन या असहजता महसूस हो सकती है। इसलिए साफ-सफाई, सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल और महिला की सहमति सबसे ज्यादा जरूरी होती है।

महिलाओं के शरीर में ये बदलाव किशोरावस्था से ही शुरू हो जाते हैं, इसलिए पीरियड आने की सही उम्र क्या है जानना जरूरी है, ताकि पीरियड और उससे जुड़े बदलावों को सही तरीके से समझा जा सके।

गर्भधारण की संभावना पीरियड से पहले

अधिकतर लोग मानते हैं कि पीरियड से ठीक पहले संबंध बनाने से प्रेगनेंसी नहीं होती, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। गर्भधारण की संभावना पीरियड से पहले कम जरूर होती है, पर शून्य नहीं।

  • अगर पीरियड साइकिल छोटा या अनियमित हो
  • ओवुलेशन देर से होता हो
  • स्पर्म महिला के शरीर में 4–5 दिन तक जीवित रह सकता हो

तो गर्भधारण की संभावना बनी रहती है। कई बार महिलाएं हल्की ब्लीडिंग को पीरियड समझ लेती हैं, जबकि वह गर्भावस्था से जुड़ी हो सकती है, जैसे 2 महीने की प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना। ऐसे में भ्रम की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी होता है।

पीरियड से पहले सेक्स के नुकसान

हर महिला के लिए पीरियड से पहले सेक्स फायदेमंद नहीं होता। कुछ मामलों में पीरियड से पहले सेक्स के नुकसान भी सामने आ सकते हैं।

  • पेट की ऐंठन और दर्द बढ़ सकता है
  • पहले से मौजूद थकान और कमजोरी ज्यादा महसूस हो सकती है
  • हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग हो सकती है
  • PMS के लक्षण जैसे चिड़चिड़ापन और सूजन बढ़ सकते हैं

अगर शरीर पहले से असहज संकेत दे रहा हो, तो ऐसे समय में संबंध बनाने से परेशानी बढ़ सकती है। इस स्थिति में आराम करना, हल्का खाना और खुद की देखभाल ज्यादा जरूरी होती है।

हार्मोनल बदलाव और यौन इच्छा

पीरियड से पहले एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में उतार-चढ़ाव होता है, जो सीधे हार्मोनल बदलाव और यौन इच्छा को प्रभावित करता है।

कुछ महिलाओं में इस समय सेक्स ड्राइव बढ़ जाती है, जबकि कुछ महिलाओं में बिल्कुल कम हो जाती है।

  • मूड स्विंग्स
  • भावनात्मक संवेदनशीलता
  • कभी-कभी उदासी या गुस्सा

ये सभी बदलाव पूरी तरह प्राकृतिक हैं। इसलिए महिला को अपने शरीर के संकेतों को समझना चाहिए और किसी भी तरह के मानसिक या भावनात्मक दबाव में आकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।

पीरियड से पहले दर्द और असहजता

कई महिलाओं को पीरियड से पहले दर्द और असहजता का सामना करना पड़ता है, जिसे आम भाषा में PMS कहा जाता है। इसमें शामिल हैं:

  • पेट और कमर में दर्द
  • स्तनों में भारीपन या संवेदनशीलता
  • सिरदर्द और थकान
  • गैस, सूजन और बेचैनी

अगर ये लक्षण ज्यादा हों, तो इस समय सेक्स करना जरूरी नहीं होता। हल्का व्यायाम, सही आहार, पर्याप्त नींद और मानसिक शांति ज्यादा फायदेमंद साबित होती है।

निष्कर्ष

अंत में यही कहा जा सकता है कि पीरियड के 2 दिन पहले संबंध बनाना चाहिए या नहीं, इसका कोई एक जैसा जवाब नहीं है। यह पूरी तरह महिला के शरीर, उसकी सहजता और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। अगर महिला शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक महसूस कर रही है, कोई दर्द या असहजता नहीं है और सुरक्षा का ध्यान रखा गया है, तो संबंध बनाना सुरक्षित हो सकता है। वहीं, अगर शरीर थकान, दर्द या चिड़चिड़ापन महसूस कर रहा है, तो आराम को प्राथमिकता देना ज्यादा सही होता है।

अपने शरीर की सुनना, पार्टनर से खुलकर बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।