मासिक धर्म के समय शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) झड़ती है और ब्लीडिंग होती है। इसी दौरान कई महिलाओं को पेट दर्द, कमर दर्द, सिरदर्द, थकान, सूजन और मूड स्विंग का अनुभव होता है। कुछ महिलाओं में इस समय कामेच्छा बढ़ जाती है क्योंकि हार्मोनल उतार-चढ़ाव संवेदनशीलता बढ़ा सकता है। वहीं कुछ महिलाओं को असहजता या थकावट महसूस होती है। इसलिए यह निर्णय पूरी तरह महिला की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है।
यह भी समझना जरूरी है कि पीरियड के दौरान शरीर थोड़ा अधिक संवेदनशील होता है। इसलिए यदि संबंध बनाए जाएं तो स्वच्छता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
मासिक धर्म में संबंध: क्या यह सुरक्षित है?
मासिक धर्म में संबंध बनाना चिकित्सा दृष्टि से पूरी तरह निषिद्ध नहीं है। यदि दोनों पार्टनर स्वस्थ हैं और सुरक्षा का उपयोग करते हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में यह सुरक्षित हो सकता है। हालांकि, इस दौरान गर्भाशय ग्रीवा थोड़ा खुला रहता है, जिससे बैक्टीरिया के प्रवेश की संभावना बढ़ सकती है। इसी कारण संक्रमण का खतरा सामान्य दिनों से थोड़ा अधिक माना जाता है।
यदि हाल ही में गर्भपात हुआ हो, तो शरीर को पूरी तरह रिकवर होने देना जरूरी है। इस विषय में विस्तार से पढ़ें-
गर्भपात के कितने दिन बाद संबंध बनाना चाहिए
इसके अलावा, जिन महिलाओं को निम्न समस्याएं हों, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए:
- अत्यधिक रक्तस्राव
- तेज पेट या पेल्विक दर्द
- बुखार या संक्रमण के लक्षण
- एंडोमेट्रियोसिस
ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है।
पीरियड के दौरान सेक्स: संभावित फायदे
कुछ महिलाओं को पीरियड के दौरान सेक्स से शारीरिक और मानसिक राहत मिलती है। इसके कुछ वैज्ञानिक रूप से समझे जाने वाले फायदे हैं:
1. क्रैम्प्स में कमी
ऑर्गेज्म के दौरान गर्भाशय की मांसपेशियां सिकुड़ती और फिर ढीली होती हैं, जिससे रक्त प्रवाह बेहतर होता है और दर्द कम हो सकता है।
2. हार्मोनल संतुलन में मदद
एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन जैसे “फील गुड” हार्मोन निकलते हैं, जिससे तनाव कम होता है।
3. बेहतर मूड
पीरियड के दौरान चिड़चिड़ापन और भावनात्मक उतार-चढ़ाव आम हैं। शारीरिक निकटता से भावनात्मक संतुलन बेहतर हो सकता है।
4. बेहतर नींद
सेक्स के बाद शरीर रिलैक्स होता है, जिससे नींद गहरी आ सकती है।
5. भावनात्मक जुड़ाव
यदि दोनों पार्टनर सहज हों, तो इस दौरान भी संबंध बनाना रिश्ते में विश्वास और समझ को मजबूत कर सकता है।
सही समय को समझना भी जरूरी है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- पति-पत्नी को संबंध कब बनाना चाहिए
मासिक धर्म के फायदे नुकसान: क्या ध्यान रखें?
जब हम मासिक धर्म के फायदे नुकसान की बात करते हैं, तो संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
फायदे:
- दर्द में राहत
- मानसिक तनाव में कमी
- भावनात्मक जुड़ाव
- प्राकृतिक लुब्रिकेशन
नुकसान:
- संक्रमण का बढ़ा जोखिम
- गंदगी या असहजता
- भारी ब्लीडिंग होने पर कमजोरी
- कुछ महिलाओं में दर्द बढ़ना
कुछ मामलों में, यदि ब्लीडिंग सामान्य से अधिक या असामान्य हो, तो यह किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। यदि पीरियड के अलावा भी ब्लीडिंग हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें- बिना पीरियड के ब्लीडिंग होना
पीरियड में प्रेगनेंसी संभावना कितनी होती है?
बहुत से लोग मानते हैं कि पीरियड के दौरान गर्भधारण नहीं हो सकता, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। पीरियड में प्रेगनेंसी संभावना कम होती है, लेकिन असंभव नहीं।
यदि मासिक चक्र छोटा हो (21–24 दिन), तो ओव्यूलेशन जल्दी हो सकता है। शुक्राणु महिला के शरीर में 3–5 दिन तक जीवित रह सकते हैं। यदि पीरियड के अंतिम दिनों में संबंध बनाए गए हों और जल्दी ओव्यूलेशन हो जाए, तो गर्भधारण संभव है।अनियमित पीरियड वाली महिलाओं में यह संभावना थोड़ी अधिक हो सकती है क्योंकि ओव्यूलेशन का समय निश्चित नहीं होता।
इसलिए:
- यदि गर्भधारण नहीं चाहते हैं, तो सुरक्षा का उपयोग करें।
- यदि गर्भधारण की योजना बना रहे हैं, तो ओव्यूलेशन ट्रैक करना जरूरी है।
पीरियड में संक्रमण का खतरा क्यों बढ़ सकता है?
पीरियड में संक्रमण का खतरा बढ़ने के पीछे मुख्य कारण यह है कि इस समय गर्भाशय की अंदरूनी परत निकल रही होती है और सर्विक्स थोड़ा खुला रहता है।
बिना सुरक्षा के संबंध बनाने से:
- बैक्टीरियल वैजिनोसिस
- यीस्ट इंफेक्शन
- यौन संचारित रोग (STI)
- यूरिन इंफेक्शन (UTI)
का जोखिम बढ़ सकता है।
यदि किसी एक पार्टनर को पहले से संक्रमण हो, तो खतरा और अधिक बढ़ जाता है। इसलिए:
- कंडोम का उपयोग करें
- संबंध के बाद सफाई रखें
- यदि जलन, खुजली या बदबूदार डिस्चार्ज हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
मासिक धर्म में सावधानियां क्या रखें?
यदि आप मासिक धर्म में सावधानियां अपनाते हैं, तो जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- हमेशा कंडोम का उपयोग करें
- संबंध से पहले और बाद में साफ-सफाई रखें
- गहरे रंग की चादर या तौलिया का उपयोग करें
- यदि बहुत अधिक दर्द हो तो संबंध न बनाएं
- अत्यधिक थकान या कमजोरी हो तो आराम करें
- संबंध के बाद पेशाब करें (UTI से बचाव में मदद मिलती है)
- यदि किसी भी तरह की असामान्य समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लें
सबसे महत्वपूर्ण है- आपसी सहमति और खुली बातचीत। यदि महिला असहज है या मानसिक रूप से तैयार नहीं है, तो संबंध बनाना उचित नहीं है।
निष्कर्ष
अब आप विस्तार से समझ चुके हैं कि पीरियड में संबंध बनाने से क्या होता है। यह पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय है और हर महिला का अनुभव अलग हो सकता है। कुछ महिलाओं को इससे दर्द में राहत और मानसिक सुकून मिलता है, जबकि कुछ को असहजता या कमजोरी महसूस हो सकती है।
यदि स्वच्छता, सुरक्षा और आपसी सहमति का ध्यान रखा जाए, तो जोखिम कम किया जा सकता है। लेकिन यदि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या, असामान्य ब्लीडिंग या संक्रमण के लक्षण हों, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
स्वस्थ संबंध वही है जिसमें दोनों पार्टनर सहज, सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें।


