सच तो यह है कि अधिकतर मामलों में यह शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। लेकिन हर बदलाव को समझना जरूरी है, क्योंकि गर्भावस्था में छोटी-सी असामान्यता भी ध्यान मांगती है। सही जानकारी आपको बेवजह की घबराहट से बचाती है और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर तक पहुंचने में मदद करती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस समय सफेद पानी आने का कारण क्या होता है और किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था में सफेद पानी आना क्या सामान्य है?

गर्भावस्था में सफेद पानी आना अक्सर एक सामान्य स्थिति होती है। इसे लीकोरिया कहा जाता है, जो हल्का सफेद या दूधिया रंग का, पतला और बिना तेज गंध वाला स्राव होता है।

नौवें महीने में यह स्राव थोड़ा बढ़ सकता है, क्योंकि शरीर गर्भाशय ग्रीवा को मुलायम कर रहा होता है और डिलीवरी के लिए तैयारी कर रहा होता है। यह स्राव योनि को साफ रखने और हानिकारक बैक्टीरिया से बचाने में भी मदद करता है।

जब तक इसमें बदबू, खुजली या जलन नहीं है, तब तक इसे सामान्य ही माना जाता है।

प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों के लक्षण और डिस्चार्ज

प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों के लक्षण पहले की तुलना में अलग महसूस हो सकते हैं। पेट का भारीपन, कमर दर्द और बार-बार पेशाब आना आम बातें हैं। इसी दौरान योनि स्राव में भी बदलाव दिखाई दे सकता है।

नौवें महीने में कई बार म्यूकस प्लग निकलता है, जो गाढ़ा, जेली जैसा या हल्का गुलाबी मिश्रित हो सकता है। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि डिलीवरी का समय नजदीक है। ऐसे समय पर महिलाएँ अक्सर 9 महीने में डिलीवरी लक्षण के बारे में जानकारी ढूंढती हैं ताकि वे समझ सकें कि शरीर क्या संकेत दे रहा है।

लेकिन पतला, हल्का सफेद स्राव आना अभी भी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

योनि स्राव के कारण क्या होते हैं?

योनि स्राव के कारण गर्भावस्था में ज्यादातर हार्मोनल बदलावों से जुड़े होते हैं। शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे योनि ग्रंथियाँ अधिक स्राव बनाती हैं। साथ ही, गर्भाशय और योनि में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है। यह शरीर की सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है, जो संक्रमण से बचाने में मदद करती है।

डिलीवरी नजदीक आने पर शरीर में हल्के संकुचन भी शुरू हो सकते हैं, जिन्हें कई बार महिलाएँ गर्भावस्था के 9 महीने में झूठी दर्द समझने की कोशिश करती हैं। ये बदलाव भी शरीर की तैयारी का हिस्सा हैं।

सामान्य और असामान्य डिस्चार्ज में अंतर

सामान्य और असामान्य डिस्चार्ज में अंतर समझना बेहद जरूरी है, खासकर प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में।

सामान्य स्राव की पहचान:

  • रंग हल्का सफेद या पारदर्शी
  • गंध बहुत हल्की या नहीं के बराबर
  • खुजली या जलन नहीं

असामान्य स्राव के संकेत:

  • पीला, हरा या धूसर रंग
  • तेज और खराब गंध
  • योनि में खुजली, जलन या सूजन
  • स्राव के साथ दर्द या जलन

ऐसे लक्षण संक्रमण का संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं।

इंफेक्शन के संकेत प्रेगनेंसी में

इंफेक्शन के संकेत प्रेगनेंसी में समय पर पहचानना बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कम हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

अगर सफेद पानी के साथ खुजली, जलन, पेशाब में दर्द या तेज गंध महसूस हो, तो यह यीस्ट इंफेक्शन या बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है।

समय पर इलाज न कराने पर यह समस्या बढ़ सकती है, इसलिए ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर स्राव पानी जैसा बहुत ज्यादा हो जाए और लगातार बहता महसूस हो, तो यह एमनियोटिक फ्लूइड लीक होने का संकेत भी हो सकता है। यह एक गंभीर स्थिति है और तुरंत अस्पताल जाने की जरूरत होती है।

इसके अलावा, अगर स्राव में खून दिखे, पेट में तेज दर्द हो या बच्चे की हरकत कम लगे, तो देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में महिलाएँ अक्सर यह जानना चाहती हैं कि 9 महीने में डिलीवरी कब हो सकती है, ताकि समय पर सही निर्णय लिया जा सके।

गर्भावस्था के अंतिम महीने में हर बदलाव को गंभीरता से लेना ही सुरक्षित मातृत्व की कुंजी है।

आखिरी बात

अब आप समझ गई होंगी कि प्रेगनेंसी में 9 महीने में सफेद पानी क्यों आता है। अधिकतर मामलों में यह शरीर की एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया होती है, जो डिलीवरी की तैयारी का हिस्सा है। हल्का, बिना गंध वाला स्राव आमतौर पर सुरक्षित होता है, लेकिन रंग, गंध या जलन जैसे बदलाव दिखें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आपका शरीर लगातार संकेत देता है उन्हें समझना और समय पर कदम उठाना ही आपके और आपके शिशु के स्वास्थ्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है।