हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए उल्टी की अवधि और तीव्रता भी अलग-अलग हो सकती है। किसी को हल्की मतली होती है तो किसी को दिन में कई बार उल्टी। इस लेख में हम मॉर्निंग सिकनेस की पूरी टाइमलाइन, इसके कारण, घरेलू उपाय और डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए – सब कुछ विस्तार से जानेंगे।
प्रेगनेंसी में उल्टी एक सामान्य लक्षण है और ज्यादातर मामलों में यह बच्चे के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर नहीं डालती। इसके अलावा, सही खान-पान और जीवनशैली अपनाने से मॉर्निंग सिकनेस को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
मॉर्निंग सिकनेस कब तक रहती है?
ज्यादातर मामलों में मॉर्निंग सिकनेस प्रेगनेंसी के 6वें हफ्ते से शुरू होती है। आमतौर पर यह समस्या पहले ट्राइमेस्टर में ज्यादा देखी जाती है। अधिकांश महिलाओं में 12 से 14 हफ्ते (3 महीने) तक उल्टी या मतली कम हो जाती है या पूरी तरह बंद हो जाती है।
कभी-कभी कुछ महिलाओं में यह समस्या दूसरे ट्राइमेस्टर तक बनी रह सकती है। बहुत कम मामलों में उल्टी पूरी प्रेगनेंसी के दौरान भी बनी रह सकती है। यह पूरी तरह शरीर के हार्मोनल रिस्पॉन्स पर निर्भर करता है।
अगर आप जानना चाहती हैं कि गर्भ ठहरने के कितने दिन बाद उल्टी होती है, तो यह लिंक बहुत उपयोगी है। इसके अलावा, महिलाओं में भूख कम होने पर उल्टी की तीव्रता बढ़ जाती है। इसलिए इस दौरान बार-बार हल्का-हल्का खाना खाना फायदेमंद होता है। पानी और हल्की चाय पीना भी मॉर्निंग सिकनेस को कम करने में मदद करता है।
पहले ट्राइमेस्टर में मतली क्यों ज्यादा होती है?
पहले ट्राइमेस्टर में मतली ज्यादा होने का मुख्य कारण शरीर में तेजी से होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं। इस समय शरीर गर्भ को स्वीकार करने की प्रक्रिया में होता है, जिससे पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है।
कई बार गंध के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है। कुछ महिलाओं को सिर्फ खाने की खुशबू या किसी perfume से भी उल्टी जैसा महसूस हो सकता है। खाली पेट रहने पर मतली और बढ़ जाती है। अगर आपको यह जानना है कि पीरियड्स मिस होने के कितने दिन बाद उल्टी लगती है, तो यह जानकारी काफी मददगार है।
इस दौरान यह भी ध्यान रखें कि बार-बार थोड़ी मात्रा में खाना, पानी और ताजे फल खाना उल्टी की तीव्रता को काफी कम कर सकता है। हल्का और सुपाच्य भोजन इस समय बहुत जरूरी होता है। गुनगुना पानी पीना, हल्की वॉकींग करना और पर्याप्त नींद लेना भी शरीर को राहत देता है।
प्रेगनेंसी में उल्टी के कारण
प्रेगनेंसी में उल्टी के पीछे कई शारीरिक और हार्मोनल कारण होते हैं। यह शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है और ज्यादातर मामलों में बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।
मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
- hCG हार्मोन का तेजी से बढ़ना
- एस्ट्रोजन हार्मोन का असंतुलन
- पाचन प्रक्रिया का धीमा होना
- थकान और नींद की कमी
- मानसिक तनाव या चिंता
इन कारणों से शरीर को गर्भावस्था के अनुसार खुद को ढालने में समय लगता है। इसके अलावा, महिलाओं में कुछ मामलों में हल्की ब्लीडिंग या पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं, जो सामान्य मानी जाती हैं।
साथ ही, जिन महिलाओं को पहले से पाचन संबंधी समस्या या एसिडिटी की समस्या होती है, उनमें उल्टी की तीव्रता थोड़ी ज्यादा हो सकती है। इसलिए सही डाइट और हाइड्रेशन इस समय बेहद जरूरी होता है।
प्रेगनेंसी में ज्यादा उल्टी होना कब चिंता की बात है?
कभी-कभी प्रेगनेंसी में ज्यादा उल्टी होना सामान्य सीमा से बाहर चला जाता है। अगर दिन में कई बार उल्टी हो, कुछ भी खाने-पीने पर उल्टी आ जाए या शरीर में पानी की कमी महसूस हो, तो यह सामान्य नहीं माना जाता। इस गंभीर स्थिति को मेडिकल भाषा में Hyperemesis Gravidarum कहा जाता है। इसमें महिला को कमजोरी, चक्कर, वजन कम होना और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
यदि यह समस्या चौथे महीने तक बनी रहे तो गर्भावस्था के 4 वें महीने में उल्टी वाली जानकारी पढ़ना उपयोगी हो सकता है इस स्थिति में घर के उपाय पर्याप्त नहीं होते और मेडिकल निगरानी की आवश्यकता होती है। डॉक्टर कभी-कभी IV फ्लूइड या आवश्यक दवाएं देने की सलाह देते हैं।
उल्टी कम करने के घरेलू उपाय
हल्की या मध्यम उल्टी के लिए कुछ उल्टी कम करने के घरेलू उपाय काफी प्रभावी साबित हो सकते हैं। ये उपाय सुरक्षित होते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाए जा सकते हैं।
फायदेमंद घरेलू उपाय:
- सुबह उठते ही कुछ सूखा खाएं (जैसे बिस्कुट या टोस्ट)
- अदरक वाली चाय या पानी लें, क्योंकि यह पेट को आराम देता है
- नींबू की खुशबू सूंघें या नींबू पानी पिएं
- दिन में 5–6 बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें
- तला-भुना और मसालेदार खाना कम करें
- हल्की वॉकींग और स्ट्रेचिंग भी मदद कर सकती है
- आराम के लिए सोते समय सिर को हल्का ऊँचा रखें
इन उपायों से पाचन बेहतर होता है और मतली की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
डॉक्टर को कब दिखाएं उल्टी में?
हालांकि उल्टी प्रेगनेंसी का सामान्य लक्षण है, लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर को कब दिखाएं उल्टी में यह जानना बहुत जरूरी होता है।
तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि:
- 24 घंटे से ज्यादा कुछ भी न रुक पा रहा हो
- बार-बार उल्टी से कमजोरी बढ़ रही हो
- पेशाब कम आ रहा हो
- वजन तेजी से घट रहा हो
- उल्टी के साथ बुखार या पेट दर्द हो
डॉक्टर जरूरत पड़ने पर दवाएं, IV फ्लूइड या डाइट में बदलाव की सलाह देते हैं, जिससे स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।साथ ही डॉक्टर आपको सही डाइट प्लान और हाइड्रेशन टिप्स भी देंगे, जिससे बच्चे और मां दोनों सुरक्षित रहें।
निष्कर्ष
तो कुल मिलाकर, प्रेगनेंसी में उल्टी कितने महीने तक होती है इसका जवाब यह है कि आमतौर पर यह समस्या पहले 3 महीनों तक रहती है और फिर धीरे-धीरे कम हो जाती है। मॉर्निंग सिकनेस गर्भावस्था का एक सामान्य हिस्सा है और ज्यादातर मामलों में यह स्वस्थ प्रेगनेंसी का संकेत होती है।
सही खान-पान, पर्याप्त आराम, हल्की एक्सरसाइज और सकारात्मक सोच से इस दौर को आसानी से संभाला जा सकता है। अगर उल्टी ज्यादा हो या शरीर कमजोर महसूस करे, तो बिना देर किए डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।


