गर्भधारण के बाद शरीर में hCG और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं, जो ओव्यूलेशन और मासिक धर्म चक्र को रोक देते हैं। इसलिए यदि पहले जैसा भारी और नियमित पीरियड आ रहा है, तो आमतौर पर इसका मतलब है कि गर्भ ठहरा नहीं है। कुछ मामलों में महिलाएँ शुरुआती महीनों में हल्की ब्लीडिंग देखकर घबरा जाती हैं और मान लेती हैं कि प्रेगनेंसी खत्म हो गई है, जबकि कई बार गर्भ सुरक्षित रहता है। इसलिए बिना जांच के निष्कर्ष पर पहुँचना सही नहीं है। शरीर में हो रहे बदलावों को समझना और समय पर जांच करवाना बहुत जरूरी होता है।
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय की अंदरूनी परत मोटी बनी रहती है ताकि भ्रूण को पोषण मिल सके। यही कारण है कि सामान्य मासिक धर्म जैसा ब्लीडिंग चक्र बंद हो जाता है।
प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग के कारण
प्रेगनेंसी में हर ब्लीडिंग पीरियड नहीं होती। इसके पीछे कई अलग कारण हो सकते हैं:
- हार्मोनल बदलाव
- इम्प्लांटेशन के समय हल्की ब्लीडिंग
- गर्भाशय ग्रीवा (cervix) का संवेदनशील होना
- यौन संबंध के बाद हल्की ब्लीडिंग
- संक्रमण या अन्य मेडिकल कारण
शुरुआती महीनों में गर्भाशय की ओर खून का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे cervix अधिक संवेदनशील हो सकती है। इसी वजह से इंटरकोर्स या अंदरूनी जांच के बाद हल्की ब्लीडिंग दिख सकती है। कई बार महिलाएँ जब यह ब्लीडिंग देखती हैं, तो उन्हें कन्फ्यूजन होता है कि कहीं पीरियड तो नहीं आ गया। ऐसे समय में शरीर के अन्य संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है, जैसे कि थकान, मतली या स्तनों में बदलाव, जो प्रेग्नेंट होने के लक्षण भी हो सकते हैं।
कभी-कभी सबकोरियोनिक हेमेटोमा (Subchorionic Hematoma) नामक स्थिति में भी ब्लीडिंग होती है, जिसमें प्लेसेंटा के पास खून का छोटा थक्का बन जाता है। अधिकतर मामलों में यह खुद ठीक हो जाता है, लेकिन डॉक्टर की निगरानी जरूरी होती है।
दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में ब्लीडिंग के कारण अलग हो सकते हैं, जैसे प्लेसेंटा प्रीविया या प्लेसेंटा का समय से पहले अलग होना। ये स्थितियाँ गंभीर हो सकती हैं और तुरंत मेडिकल देखभाल की जरूरत होती है।
इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग क्या होती है
इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग क्या होती है – यह तब होती है जब निषेचित अंडा गर्भाशय की दीवार से जुड़ता है।
यह आमतौर पर:
- बहुत हल्की होती है
- गुलाबी या भूरे रंग की हो सकती है
- 1–2 दिन तक रहती है
- तेज दर्द या भारी फ्लो नहीं होता
यह ब्लीडिंग अक्सर उसी समय होती है जब महिला अपने पीरियड की उम्मीद कर रही होती है। इसलिए भ्रम होना स्वाभाविक है। अगर आपने हाल ही में प्रेगनेंसी प्लान की है और यह समझना चाहती हैं कि जल्दी प्रेग्नेंट कैसे होते हैं, तो आपको ओव्यूलेशन टाइमिंग, हेल्दी लाइफस्टाइल और सही जानकारी पर ध्यान देना चाहिए। इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग उसी सफल निषेचन की शुरुआती निशानी हो सकती है।
कुछ महिलाओं को इस दौरान हल्का पेट दर्द या भारीपन भी महसूस हो सकता है, जो सामान्य है। लेकिन अगर दर्द तेज हो या ब्लीडिंग बढ़ती जाए, तो यह सामान्य इम्प्लांटेशन नहीं माना जाता।
प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग सामान्य है या नहीं
प्रेगनेंसी में स्पॉटिंग सामान्य है या नहीं – इसका जवाब है:
👉 हल्की स्पॉटिंग कभी-कभी सामान्य हो सकती है, खासकर शुरुआती महीनों में।
स्पॉटिंग का मतलब है बहुत कम मात्रा में खून का धब्बा दिखना, जो अंडरवियर या टिश्यू पर नजर आता है। यह पीरियड जैसा लगातार बहाव नहीं होता। हालांकि, अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं या शुरुआती स्टेज में हैं, तो शरीर को मजबूत बनाने और गर्भ ठहरने की संभावना बढ़ाने के लिए कुछ महिलाएँ जल्दी प्रेग्नेंट होने के लिए घरेलू उपाय भी अपनाती हैं, जैसे संतुलित आहार और तनाव कम करना।
दूसरी तिमाही या तीसरी तिमाही में स्पॉटिंग को सामान्य नहीं माना जाता, खासकर अगर उसके साथ दर्द, दबाव या पानी जैसा डिस्चार्ज हो। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर स्पॉटिंग केवल एक बार हुई है और खुद रुक गई है, तब भी अगली चेकअप में डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें।
गर्भावस्था में पीरियड जैसा दर्द क्यों होता है
कई महिलाओं को प्रेगनेंसी में हल्का खिंचाव या गर्भावस्था में पीरियड जैसा दर्द क्यों होता है जैसा महसूस हो सकता है। इसके कारण हो सकते हैं:
- गर्भाशय का फैलना
- लिगामेंट्स का खिंचना
- हार्मोनल बदलाव
जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, गर्भाशय को सहारा देने वाले लिगामेंट्स खिंचते हैं, जिससे निचले पेट या कमर में हल्का दर्द महसूस हो सकता है। इसे राउंड लिगामेंट पेन भी कहा जाता है। कभी-कभी गैस, कब्ज या पाचन संबंधी बदलाव भी पेट में दर्द जैसा एहसास करवा सकते हैं, जिसे महिलाएँ पीरियड दर्द समझ लेती हैं।
यह दर्द हल्का और अस्थायी हो तो आम बात है। लेकिन अगर दर्द तेज हो, एक साइड ज्यादा हो या ब्लीडिंग के साथ हो तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
पीरियड और प्रेगनेंसी ब्लीडिंग में अंतर
पीरियड और प्रेगनेंसी ब्लीडिंग में अंतर समझना बहुत जरूरी है:
| विशेषता | पीरियड | प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग |
|---|---|---|
| फ्लो | ज्यादा और लगातार | हल्का, स्पॉटिंग जैसा |
| अवधि | 3–7 दिन | कुछ घंटों से 1–2 दिन |
| रंग | चमकीला लाल | गुलाबी, भूरा या हल्का लाल |
| दर्द | ऐंठन आम | हल्का खिंचाव, पर तेज दर्द असामान्य |
पीरियड में खून की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ती और घटती है, जबकि प्रेगनेंसी ब्लीडिंग अक्सर अचानक शुरू होकर जल्दी रुक जाती है।
पीरियड के दौरान अक्सर थकान, मूड स्विंग और भारीपन भी होता है, जबकि प्रेगनेंसी ब्लीडिंग के साथ मतली, उल्टी या स्तनों में संवेदनशीलता जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
प्रेगनेंसी में कब डॉक्टर से संपर्क करें
प्रेगनेंसी में कब डॉक्टर से संपर्क करें यह जानना बहुत जरूरी है। तुरंत डॉक्टर से मिलें अगर:
- तेज लाल रंग की ब्लीडिंग हो
- पैड भरने जितनी ब्लीडिंग हो
- पेट या कमर में तेज दर्द हो
- चक्कर, कमजोरी या बेहोशी जैसा लगे
- बुखार या दुर्गंध वाली डिस्चार्ज हो
अगर पहले गर्भपात या एक्टोपिक प्रेगनेंसी का इतिहास रहा है, तो हल्की ब्लीडिंग पर भी डॉक्टर से सलाह लेना सुरक्षित रहता है। समय पर जांच माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
डॉक्टर अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और शारीरिक जांच के जरिए यह पता लगाते हैं कि गर्भ सामान्य रूप से विकसित हो रहा है या नहीं।
निष्कर्ष
अब आप समझ गई होंगी कि प्रेग्नेंट होने के बाद भी पीरियड आता है क्या इसका जवाब है नहीं, लेकिन प्रेगनेंसी में कुछ कारणों से ब्लीडिंग हो सकती है, जो पीरियड जैसी लग सकती है। हर ब्लीडिंग खतरे की निशानी नहीं होती, लेकिन हर ब्लीडिंग को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। सही जानकारी, लक्षणों पर ध्यान और समय पर डॉक्टर से सलाह यही स्वस्थ गर्भावस्था की कुंजी है।
जागरूक रहें, शरीर के संकेत समझें और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सलाह लें। यही माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका है।


