कई कपल्स के लिए बार-बार कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण न होना मानसिक और भावनात्मक रूप से काफी परेशान करने वाला हो सकता है। ऐसी स्थिति में सही समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि समस्या की जड़ को समझकर सही इलाज शुरू किया जा सके।
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दिव्य गर्भ संस्कार विज्ञान
मासिक धर्म महिलाओं के स्वास्थ्य का अहम हिस्सा है। लेकिन कई बार पीरियड समय पर नहीं आते, कम आते हैं या रुक-रुक कर आते हैं। ऐसी स्थिति में महिलाएं अक्सर दवाइयों की जगह पीरियड खुलकर आने के घरेलू उपाय ढूंढती हैं। कुछ प्राकृतिक तरीके शरीर को संतुलित करने, गर्भाशय में रक्त प्रवाह बढ़ाने और मासिक चक्र को नियमित करने में मदद कर सकते हैं।
गर्भावस्था हर महिला के लिए एक भावनात्मक और शारीरिक यात्रा होती है। लेकिन कभी-कभी परिस्थितियां हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं और गर्भपात (Miscarriage) हो सकता है। कई मामलों में गर्भपात पूरी तरह से नहीं हो पाता और गर्भ के कुछ हिस्से गर्भाशय में रह जाते हैं। ऐसी स्थिति को Incomplete Miscarriage कहा जाता है। अधूरा गर्भपात के लक्षण को समय पर पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि लापरवाही संक्रमण, अधिक रक्तस्राव और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
मां बनने की संभावना का पता लगाना किसी भी महिला के लिए भावनात्मक और संवेदनशील पल होता है। आजकल मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिलने वाली किट की मदद से घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें यह जानना बहुत आसान हो गया है। लेकिन सिर्फ टेस्ट करना ही काफी नहीं - सही समय, सही तरीका और रिज़ल्ट को सही समझना बेहद जरूरी है, ताकि किसी तरह की गलतफहमी या तनाव न हो।
महिलाओं के लिए समय पर पीरियड आना शरीर के स्वस्थ होने का एक संकेत माना जाता है। लेकिन जब डेट निकल जाए और पीरियड न आए, तो मन में चिंता होना स्वाभाविक है। ऐसे में सबसे पहले दिमाग में यही सवाल आता है क्या यह प्रेगनेंसी है या कोई हार्मोनल गड़बड़ी? कई बार शरीर छोटे बदलावों के जरिए संकेत देता है कि अंदर हार्मोनल संतुलन बदल रहा है। इसलिए देरी को समझना और उसके कारण जानना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी हो जाता है।
गर्भावस्था के दौरान शारीरिक संबंधों को लेकर कई सवाल दिमाग में आते हैं। उनमें से एक आम सवाल है - प्रेगनेंसी में स्पर्म अंदर जाने से क्या होता है? क्या इससे बच्चे को नुकसान हो सकता है? क्या यह सुरक्षित है या इससे कोई जोखिम हो सकता है? कई दंपत्ति इस विषय पर खुलकर बात नहीं कर पाते, जिससे मन में डर और गलतफहमियां बनी रहती हैं। सही जानकारी की कमी अक्सर अनावश्यक चिंता का कारण बनती है, जबकि ज्यादातर मामलों में स्थिति सामान्य होती है।
पीरियड के टाइम दर्द कई महिलाओं के लिए हर महीने होने वाली एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। किसी को हल्का दर्द होता है तो किसी को इतना तेज कि रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है। यह दर्द आमतौर पर पेट के निचले हिस्से, कमर या जांघों तक फैल सकता है। कई बार यह दर्द पीरियड शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही महसूस होने लगता है।
गर्भाशय में रसौली (Uterine Fibroid) महिलाओं में पाई जाने वाली एक बहुत ही सामान्य समस्या है। यह गैर-कैंसर (non-cancerous) गांठें होती हैं जो गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार में विकसित होती हैं। कई महिलाओं को जीवन में कभी न कभी यह समस्या हो सकती है, लेकिन हर केस में लक्षण दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है।
कई महिलाओं और कपल्स के मन में यह सवाल आता है कि पीरियड में प्रेगनेंसी हो सकती है या नहीं। आम धारणा यह है कि पीरियड के दिनों में संबंध बनाने से गर्भधारण संभव नहीं होता, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग हो सकती है। हर महिला की बॉडी, हार्मोनल साइकिल और ओव्यूलेशन टाइम अलग होता है, इसलिए रिस्क पूरी तरह शून्य नहीं माना जाता। कई बार गलत जानकारी या सुनी-सुनाई बातों के कारण लोग पीरियड को पूरी तरह “सेफ टाइम” मान लेते हैं, जो सही नहीं है। सही प्रजनन जानकारी न होने से अनचाही प्रेगनेंसी का खतरा बढ़ सकता है।

