पीरियड बंद होना यानी मेनोपॉज़, महिलाओं के जीवन का एक प्राकृतिक हिस्सा है। आमतौर पर यह 45–55 साल की उम्र में होता है, लेकिन कभी-कभी यह जल्दी या देर से भी हो सकता है। इस समय शरीर में कई हार्मोनल बदलाव आते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। पीरियड बंद होने के बाद क्या होता है यह जानना हर महिला के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चरण जीवन में नई चुनौतियाँ और बदलाव लेकर आता है।
-
गर्भावस्था
-
गर्भावस्था के चरण
-
गर्भावस्था के लक्षण और बदलाव
-
गर्भावस्था में आहार और पोषण
-
गर्भावस्था में जीवनशैली और देखभाल
-
गर्भावस्था में स्वास्थ्य समस्याएं और उसकी देखभाल
-
गर्भावस्था में आयुर्वेद और घरेलू उपाय
-
प्रसव के बाद की देखभाल
-
पीसीओएस
-
पीसीओडी
-
पीरियड्स
-
प्रेगनेंसी डिलीवरी डेट कैलकुलेटर
-
प्रेगनेंसी के लक्षण
-
सेक्स
-
गर्भधारण की तैयारी
-
गर्भावस्था में सेक्स और संबंध
-
बच्चे का विकास और प्रसव
-
गर्भावस्था से जुड़े मिथक और सच्चाई
-
पीरियड्स और हार्मोनल असंतुलन
-
अंडाशय की गुणवत्ता कैसे सुधारें?
-
पीसीओएस और पीसीओडी के लिए आहार और उपचार
The fifth month of pregnancy is an exciting and reassuring phase for most expecting parents because the baby’s development becomes more noticeable and pregnancy-related discomfort often reduces. Many women begin to feel clearer and more regular baby movements, which creates a strong emotional connection. At this stage, parents frequently search for 5 Month Pregnancy Baby […]
दिव्य गर्भ संस्कार विज्ञान
Pregnancy can be a beautiful experience, but it can accompany numerous physical phenomena that can confuse and alarm expectant mothers. One among them, especially during the last few months, would be False Labour Pain. Many would wrongly assume that labor has started when they experience contractions, thereby creating unnecessary tension and anxiety as they visit the hospital. Awareness about what constitutes false labor pain and how it can be identified would certainly help them stay uninflamed and ready for the actual delivery.
गर्भपात एक शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का अनुभव होता है। इस समय महिलाओं को अपने शरीर और मानसिक स्वास्थ्य का खास ध्यान रखना बहुत जरूरी है। सही देखभाल न होने पर संक्रमण, कमजोरी या भावनात्मक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि गर्भपात के बाद सावधानियां क्या हैं, किस तरह का खाना और आराम जरूरी है, और किस चीज़ से बचाव करना चाहिए। साथ ही यह भी जानेंगे कि mental health और भावनात्मक समर्थन क्यों महत्वपूर्ण है।
आज के समय में महिलाओं में हार्मोनल समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें PCOS एक बहुत ही आम समस्या बन चुकी है। खासकर युवा लड़कियाँ, कामकाजी महिलाएँ और वे महिलाएँ जो भविष्य में प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं, PCOS से ज्यादा प्रभावित होती हैं। सही जानकारी और समय पर ध्यान न देने के कारण यह समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है।
प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को अपने खान-पान को लेकर सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है। इस समय शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो पाचन, इम्युनिटी और भावनात्मक स्थिति को भी प्रभावित करते हैं। ऐसे में हर खाद्य पदार्थ को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसके अलावा, कुछ फलों और सब्जियों के सेवन को लेकर अक्सर भ्रांतियां और डर भी होते हैं, जिससे सही निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए भरोसेमंद और वैज्ञानिक जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है।
पीरियड के दिनों में पेट दर्द होना ज्यादातर महिलाओं के लिए एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। इस दर्द के कारण न सिर्फ शारीरिक असहजता होती है, बल्कि मूड, नींद और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो जाती हैं। कई महिलाओं को स्कूल, कॉलेज या ऑफिस जाना भी मुश्किल लगने लगता है। कुछ महिलाओं में दर्द हल्का होता है, जबकि कुछ को तेज ऐंठन, कमर दर्द और थकान का सामना करना पड़ता है। कई बार दर्द इतना ज्यादा होता है कि आराम किए बिना दिन बिताना मुश्किल हो जाता है।

